आयुर्वेद पथ चिकित्सालय

धातुसार पुरुष परीक्षा प्रश्नावली

चरकसंहिता — विमानस्थान, अष्टविध सारपरीक्षा के आधार पर
(प्राचीन संस्कृत श्लोक व हिंदी टीका के आधार पर तैयार)
नाम:
आयु:
लिंग:
दिनांक:
निर्देश: प्रत्येक धातु/भाव सार के अंतर्गत जो-जो लक्षण आप में मौजूद पाए जाएँ, उनके सामने ✔ लगाएँ। हर सार के अंत में उपस्थित लक्षणों का प्रतिशत स्वतः दिख जाएगा — (चेक किए गए लक्षण ÷ कुल लक्षण) × 100। अंत में दी गई सारणी व ग्राफ में सभी आठ सारों का तुलनात्मक प्रतिशत दिखाई देगा, और जिस भी सार में कुछ भी प्रतिशत आएगा, वहाँ उसके अतिरिक्त गुण भी बताए जाएँगे।

त्वक्सार पुरुष

(त्वचा से संबंधित लक्षण)
  • त्वचा स्निग्ध (चिकनी) है
  • त्वचा श्लक्ष्ण-कोमल (मुलायम) है
  • त्वचा प्रसन्न अर्थात् मल-रहित, साफ है
  • त्वचा सूक्ष्म अर्थात् पतली है
  • त्वचा में गहराई/गंभीरता है
  • त्वचा पर सुकुमार (मुलायम) रोम हैं
  • त्वचा चमकदार है
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रक्तसार पुरुष

(कान, नेत्र, मुख, जीभ, नासिका, ओष्ठ, हाथ-पैर के तलवे, नख, ललाट, मूत्रेन्द्रिय)
  • उपरोक्त अंग स्निग्ध (चिकने) हैं
  • उपरोक्त अंग रक्तवर्ण (लाल आभायुक्त) हैं
  • उपरोक्त अंग शोभायुक्त (सुंदर) हैं
  • उपरोक्त अंग चमकने वाले हैं
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मांससार पुरुष

(शंखप्रदेश, ललाट, ग्रीवा-पश्चभाग, नेत्र, गाल, हनु, गर्दन, कंधा, उदर, कांख, छाती, हाथ, पैर, संधियाँ)
  • उपरोक्त अंग भारी (भरे हुए) हैं
  • उपरोक्त अंग स्थिर हैं
  • उपरोक्त अंग मांस से भरे व दृढ़ (मज़बूत) हैं
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मेदसार पुरुष

(चिकनाई/स्निग्धता किन-किन में पाई जाती है)
  • स्वर (आवाज़) में चिकनाई है
  • आँखों में चिकनाई/चमक है
  • केशों (बालों) में चिकनाई है
  • शरीर के रोमों में चिकनाई है
  • नाखूनों में चिकनाई है
  • दांतों में चिकनाई है
  • ओष्ठ (होंठों) में चिकनाई है
  • मूत्र में चिकनाई/स्निग्धता है
  • मल में चिकनाई/स्निग्धता है
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अस्थिसार पुरुष

(एड़ी, गुल्फ, जानु, अरत्नि, जत्रु, चिबुक, सिर, जोड़, अस्थि, नख, दांत)
  • एड़ी मोटी/मज़बूत है
  • गुल्फ (टखना) मोटा है
  • जानु (घुटना) मोटा है
  • अरत्नि (बाहु) मोटी है
  • जत्रु (हंसली) मोटी है
  • चिबुक (ठुड्डी) मोटी है
  • सिर की बनावट मोटी/मज़बूत है
  • शरीर के जोड़ मोटे हैं
  • अस्थि (हड्डियाँ) मोटी हैं
  • नाखून मोटे हैं
  • दांत मोटे हैं
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मज्जासार पुरुष

(संधियों व शरीर की गोलाई/मज़बूती से संबंधित लक्षण)
  • अंग पतले हैं
  • शरीर का वर्ण व स्वर कोमल/चिकना है
  • शरीर की संधियाँ मोटी हैं
  • शरीर की संधियाँ लंबी हैं
  • शरीर की संधियाँ गोलाकार हैं
  • व्यक्ति बलवान है
  • नेत्र बड़े-बड़े हैं
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शुक्रसार पुरुष

(दृष्टि, नेत्र, मनःस्थिति, दांत, शरीर की चमक)
  • स्वभाव सौम्य (कोमल) है
  • दृष्टि सौम्य है
  • नेत्र दूध-सा श्वेत व दयायुक्त प्रतीत होते हैं
  • मन सदा प्रसन्न रहता है
  • दांत चिकने व गोलाकार हैं
  • दांत दृढ़, ठोस व समान (अग्रभाग बराबर) हैं
  • शरीर का वर्ण व स्वर निर्मल-चिकना है
  • शरीर में चमक है तथा नितम्ब बड़े-बड़े हैं
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सत्त्वसार पुरुष

(मन, बुद्धि व स्वभाव से संबंधित लक्षण)
  • स्मरणशक्ति अच्छी है
  • भक्ति-सम्पन्न है
  • कृतज्ञ (एहसानमंद) स्वभाव है
  • बुद्धिमान है
  • पवित्र (शुद्ध आचरण) है
  • उत्साह अधिक रहता है
  • चतुर है
  • धैर्यवान है
  • संकट/लड़ाई में पराक्रमपूर्वक सामना करता है
  • शरीर व मन में विषाद (उदासी) नहीं होता
  • चाल-ढाल (गति) स्थिर है
  • बुद्धि गंभीर है
  • चेष्टाएँ (कार्यशैली) गंभीर हैं
  • सदैव कल्याणकारी विषयों में मन लगाता है
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तुलनात्मक सारणी — किस धातु/भाव का सार कितने प्रतिशत?

धातु/भाव सार प्राप्त / कुल लक्षण प्रतिशत बार प्रतिशत
कृपया ऊपर लक्षणों को चिह्नित करें — यहाँ प्रधान धातुसार स्वतः दिखाई देगा।